Mahadeva Shiv

Abhilipsa Panda | Mahadev Shambho | Shiv Shambho

Mahavir | Mahadeva Shiva | Spark6026

Mahadeva Shiva

Shiva is referred to as the "destroyer" within the Trimurti, the Hindu trinity which also includes Brahma and Vishnu. In the Shaivite tradition, Shiva is the Supreme Lord who creates, protects and transforms the universe. In the goddess-oriented Shakta tradition, the Supreme Goddess (Devi) is regarded as the energy and creative force (Shakti) and as a complementary companion to Shiva. Shiva is one of the five equivalent deities in Panchayatan worship of the Smarta tradition of Hinduism.

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॥श्री शिव चालीसा॥

॥ दोहा॥

जय गणेश गिरजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देऊ अभय वरदान॥


॥चौपाई॥

जय गिरजापति दीन दयाला।

सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके।

कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर सिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥

मैना मातु की हवै दुलारी। वाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहिं जाय पुकारा। तबहिं दुख प्रभु आप निवारा॥

कियो उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायो। लवनिमेष महँ मारि गिरायो॥

आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरव प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

वेद नाम महिमा तब गाई। अकथ अनादि ते नहिं पाई॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए बिहाला॥

कीन्ह दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नैन पूजन चहं सोई॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारौ। यहि अवसर मोहि आनि उबारौ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारहो। संकट से मोहि आन उबारहो॥

मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी। आप हरहु मम संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई याचहिं सो फल पाहीं॥

अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशक। मंगल कारण विघ्न विनाशक॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाये। सुर ब्रह्मादिक पार न पाये॥

जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥

ॠनियां जो कोई हो तुम्हे पुकारी। पाठ करत छूटे दुख भारी॥

करे पुत्र की इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावै। ध्यान पूर्वक होम करावै॥

त्रयोदशी व्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावै। शंकर सम्मुख पाठ सुनावै॥

जन्म जन्म के पाप नसावै। अन्त वाम शिवपुर में पावै॥

कहे अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥


॥दोहा॥

नित्य नेम कर प्रातः ही, पाठ करो चालीस। तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥

मघसि छठ हेमन्त ॠतु, संवत् चौंसठ जान। अस्तुति चालीसा शिवहिं, पूर्ण होय कल्यान॥

॥ इति श्री शिव चालीसा॥

विवेक प्रकाशन

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शिव को त्रिमूर्ति के भीतर "विनाशक" के रूप में जाना जाता है, हिंदू त्रिमूर्ति जिसमें ब्रह्मा और विष्णु भी शामिल हैं। परंपरा में, शिव सर्वोच्च भगवान हैं जो ब्रह्मांड की रचना, रक्षा और परिवर्तन करते हैं। देवी-उन्मुख शाक्त परंपरा में, सर्वोच्च देवी (देवी) को ऊर्जा और रचनात्मक शक्ति (शक्ति) और शिव के समान पूरक साथी के रूप में माना जाता है। शिव हिंदू धर्म की स्मार्टा परंपरा की पंचायतन पूजा में पांच समकक्ष देवताओं में से एक हैं।

Mahadev Shambho ( Shiv Shambho )

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महादेव शिव के अनेक रूप